
प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए केंद्र का कड़ा कदम
हाल ही में NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को लेकर हुए छात्र आंदोलनों से पूरा भारत देशभर में चर्चा और विरोध के माहौल से गुजर रहा है। हर वर्ष लाखों भारतीय युवा कई महीनों की कड़ी मेहनत के बाद सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं। उनके लिए एक पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
प्रश्नपत्र लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताएं इस अवसर को नष्ट कर देती हैं। साथ ही, इससे सरकारी भर्ती व्यवस्था के प्रति आम लोगों का विश्वास भी कम होता है।
इसी चिंता को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026 के माध्यम से वर्ष 2024 में बनाए गए मौजूदा कानून को और अधिक सख्त एवं प्रभावी बनाया है।
“Public Examinations Act 2024 क्या है?”
Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 भारत का एक कानून है, जिसका उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, नकल, धोखाधड़ी और अन्य अनुचित साधनों को रोकना है।
इस कानून में परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों और संगठित गिरोहों के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संशोधन के मुख्य उद्देश्य
- प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकना।
- संगठित परीक्षा धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना।
- ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना।
- योग्यता और मेरिट के आधार पर भर्ती सुनिश्चित करना।
- परीक्षा से जुड़ी सभी सूचनाओं और प्रक्रियाओं की सुरक्षा बढ़ाना।
- परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ाना।
- तेज जांच और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना।
- सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रति आम जनता का विश्वास बहाल करना।
संशोधित कानून में प्रमुख बदलाव
| प्रावधान | 2024 का कानून | 2026 का संशोधन |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत अपराधी (धारा 10) | 3 से 5 वर्ष की कारावास और 10 लाख रुपये तक जुर्माना | 5 से 10 वर्ष की कारावास और 50 लाख रुपये तक जुर्माना |
| सेवा प्रदाता संस्था (धारा 10) | 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 4 वर्ष के लिए परीक्षा संचालन पर प्रतिबंध | 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 8 वर्ष के लिए परीक्षा संचालन पर प्रतिबंध |
| निदेशक/उच्च पदस्थ प्रबंधन (धारा 10) | 3 से 10 वर्ष की कारावास और 1 करोड़ रुपये जुर्माना | 5 से 10 वर्ष की कारावास और 5 करोड़ रुपये जुर्माना |
| संगठित परीक्षा अपराध (धारा 11) | 5 से 10 वर्ष की कारावास और न्यूनतम 1 करोड़ रुपये जुर्माना | 7 से 10 वर्ष की कारावास और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये जुर्माना |
स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की भूमिका
संशोधन के तहत केंद्र सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने की शक्ति दी गई है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली संगठित धोखाधड़ी, प्रश्नपत्र लीक और अन्य गंभीर अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाना है।
दो महीने में जांच पूरी
- परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है।
- जिस पुलिस एजेंसी, केंद्रीय जांच एजेंसी या STF को मामले की जांच सौंपी जाएगी, उसे निर्धारित समय में जांच पूरी करनी होगी।
- इससे जांच में अनावश्यक देरी को कम करने और मामलों को जल्द आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट
परीक्षा से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया गया है।
- मामलों की सुनवाई दो दिनों के भीतर शुरू करनी होगी।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान है।
- लंबित मामलों को भी स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है।
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने होंगे।
- संबंधित मामलों में BNS या अन्य कानूनों के तहत अपराधों की सुनवाई भी साथ में की जा सकेगी।
समयबद्ध अपील प्रक्रिया
इस संशोधन में अपील के लिए भी स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या किसी अन्य आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जा सकेगी। इस अपील की सुनवाई दो न्यायाधीशों वाली पीठ (Two-Judge Bench) द्वारा की जाएगी।